हम मौन थे ओर न जाने ये समय कब आगे बढ गया।
कल जो था, न जाने कब युगान्तर बन गया।
दोष किसका था, ये  न जानता था कोई।
पङ गये विरान ये घर, हो गयी कुछ रात सी।
कल सुबह होगी, छोङ दी ये आश भी।
""कुछ नही बिगङा हे अब भी,
कहनी इतनी सी बात थी।""
पर हम सब तो मौन थे, टल गयी ये बात भी।



हो चली फिर देर कुछ यू, खो गये हम खुद मे ही।
आ गयी फिर ॠतु बंसत की, सूखे पत्ते खो गये।
कुछ पूरानी डालीयो पर नये कोपल आ गये,
ओर कुछ पूरानी डालीया फिर न हो सकी हरी।
हम मोन थे, स्तब्ध थे, काल खण्ड बदलता रहा।

खो चुकी थी आन अपनी, पहचान अपनी ये धरा।
खो गया था इतिहास मेरा, जो मन के पन्नो पर था छपा।
गॉव मेरा मौन था,  पित्र मेरे मौन थे।
क्या बदलने को चले थे, क्या बदलकर रख दिया।
मै बङा हूँ या वो बङा, इसमे फस के रह गये।
""कुछ नही बिगङा हे अब भी,
कहनी इतनी सी बात थी।""
पर हम सब तो मौन थे, टल गयी ये बात भी।


देश की वीर मीडिया

सच में बहुत ही जांबाज हे मेरे देश की मीडिया। इसको बिल्कुल भी डर नहीं लगता र्बोडर लाइन पर जा कर कवरेज करने में, ना ही प्राकृतिक आपदा के दिनों में केदारनाथ पहुँचने में। कभी-कभी लगता हे, जैसे देश की आन्तरिक व बाहरी सुरक्षा हमारी मीडिया ही कर रही है, और बाकी सब तो इनके आदेश का इन्तजार कर रहे है।

चाहे देश को 2 सालो में चीन से आगे ले जाने की बात हो या आतंकी देशों को धूल चटाने की, इनके जानकार लोग हर वक्त प्लान के साथ तैयार रहते है। इनके सवालों व समाधानों का तो साहब में कायल हूँ, चाहे करप्शन हो या किसानों की समस्या, बाढ हो या सूखा, बच्चा गढे में गिरा या शराबी नाले में, आपके घर में लालटेन है या शौचालय, ये किसी भी विषय को नहीं छोड़ते, क्योंकि समाधान किसी के पास हे तो वो हे हमारी मीडिया।
Article on Media, Indian Media, Best Article on Media


बस कुछ ही चैनल बचे हे, जिसमें दो देशों के बीच बढ रहे तनाव को ब्रेकिंग न्यूज नही माना जाता है, बल्कि एक गंभीर चुनौती समझा जाता है। वो है, देश का नेशनल चैनल व एनडीटीवी जैसे कुछ र्द्रुलभ चैनल। अब प्रश्न ये भी हे कि ब्रेंकिग न्यूज, चाय के साथ लिया जाने वाला बिस्कुट बन गया हे, तो जनता से भी ये बिस्कुट छोड़ा नहीं जाता है। कुछ लोगों से हमने पुछा आपने नेशनल न्यूज चैनल कब देखा था, और महिने में कितने बार देखते हो, हालांकि ये कोई सर्वे नहीं था, पर बहुत से लोगों का जवाब था कि 26 जनवरी व 15 अगस्त को देखा होगा या फिर उनको याद नहीं था। 

चैनलों की स्वामी भक्ति से कोई एतराज नहीं है, उनका चैनल हे कुछ भी दिखाये। परन्तु प्रश्न यह है, एक खबर को 12 घण्टे अलग-2 तरह से चलाने का हुनर किसने सिखाया। कैसे आप वातानुकूलित कमरों में बैठकर सेना, अधिकारियों, किसानों, मजदूरों को हर वक्त ज्ञान बाट सकते हो। क्यों आपके चैनलों पर आपकी इंडस्ट्री में हो रहे भ्रष्टाचार की खबरें नहीं आती? क्यों आप उन रिपोर्टर का नाम नहीं लेते, जो किसी व्यक्ति या विषय पर गलत न्यूज चलाता है? ये सभी प्रश्न आपको अपने अस्तित्व को बनाये रखने के लिए खुद से पुछने होगे।

देश की असली समस्याओं पर आपको अपना साहस दिखाना होगा, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, ग्रामीण क्षेत्रों का पलायन, गरीबी ओर न जाने कितनी बातों में आपकी साहसिक भूमिका की जरूरत है। जहाँ आपकी जरूरत हे वहाँ टी.आर.पी. नहीं है, और हमारे बार्डर पर आपकी जरूरत नहीं हे, वहाँ आपकी ब्रेकिंग न्यूज है। मैं उत्तराखण्ड से हूँ, एक सत्य बात बताता हूँ। केदारनाथ आपदा के दौरान बहुत से रिर्पोर्टर देव प्रयाग व श्रीनगर के आस पास जा कर ही दावा कर रहे थे कि हम जान का जोखिम लेकर केदारघाटी से रिर्पोर्टींग कर रहे है, और हम लोग ये देखकर दंग थे।

हमारी इस साहसी मीडिया को मेरा सलाम। सभी से आग्रह हे अपनी पसंद का चैनल जरूर देखे पर आंख बन्द कर के भरोसा ना करें। अपने अधिकारियों, सेना व देशवासियों का सम्मान करें। जरूरी लगे तो सवाल कीजिए, विरोध कीजिए सरकार का, पर जो टी.वी. पर परोसा जा रहा है, उसको आखिरी सत्य ना माने।

अपनी बाते व सुझाव जरूर दीजिए व पोस्ट महत्वपूर्ण लगे तो शेयर करें।

दर्द ही दर्द हे, मेरे देश के सीने में,
इस दर्द से मेरा दिल भी पसीज जाता है।
ये जो बच्चे सो रहे है सड़को पर,
इनको देख विकास की बातों से भरोसा उठ जाता है।

कभी शहादत जवानों की सुनता हूँ,
तो कभी खुदकुशी किसानों की।
जब भी ये बेहाली देखता हूँ,
जय जवान, जय किसान का नारा भूल जाता हूँ।

राह चलती लड़की संग, जब ये दुर्व्यवहार होता है,
तब अपने दिये वोट पर, मैं ही खुद पछताता हूँ।
जब सरकारे घोटाला कर रही होती हे, 
तो आम इनसान को लाचार पाता हूँ।

जब जगमगाती गाड़ीयॉ, गरीबों को रौंद जाती है,
और अदालत में घरवालों को खरी खोटी सुनायी जाती है।
तब विश्वास होता हे, कानून तो अपना अंधा है।

हर बार दिल ऐसे ही दर्द में डूब जाता है,
जब देश का दर्द ऐसे सामने आता है।

On request of our readers, we have decided to share Poem & Shayari Image of complete poem with you, so you can share it easily at your social media sites.
Hindi Poem Image, Poem Image, Poetry Image

पाँच साल में आता है,
ये चुनाव का मौका हर रोज नहीं आता है।
कुछ समझ को बढाओ, मेरे समझदारों,
इन नेताओं को इनका असली चेहरा दिखाने का मौका रोज नहीं आता।
Political Poem, Hindi Poem, Best Poem Collection

जब ये आये कैमरों के संग घर रोटी खाने,
तो इनकी एक थाली की कीमत जान लेना।
जब ये दे मुफ्त की चीजे,
तो किसकी जेब खाली की ये पूछ लेना।
हर रोज ये दिन आयेगा नहीं,
लगे हाथों कितना पढे़ं हे, ये भी जान लेना।

जो ये बैठ जाये जमी पर,
तो इनसे इस की कीमत जान लेना।
और भी तो बहुत बाते होंगी तेरे मन में,
आज तेरा दिन हे, हर तरफ से इनको टटोल लेना।
फिर पाँच साल का वनवास हे बाबू,
इस बार किसी राम के हाथों ही राज्य सौंप देना।

मेरा खून खोल जाता है,
जब भी मेरी जमी पर कोई वारदात होती है।
दो दिन तो मैं कहता हूँ,
मैं फिक्रमंद हूँ इस सर जमी का।
फिर दिन बीते, महिने बीते,
करने लगा फिर में राजनीति।
Poem on Politics, Ideology Poem, Shayari

मेरा ना कोई धर्म है, ना हे जाति,
अब मानवता भी मर गयी हे मेरी।
मुझे फायदे दिखते हे मेरे,
ये शहादतो पर मोन होना तो मेरी मजबूरी है।

मुझे फर्क नहीं पड़ता, किसान क्यों हे मरते,
ये सुखा, ये बाढ क्यों हे आती।
मुझे तो मंच हे मिल जाता,
जब भी कोई खबर हे आती।

मुझसे उम्मीद लगाने वाले की हे गलती,
क्यों तुम मुझे 70 सालो में न समझे।
मुझे सिर्फ वोट से हे मतलब,
बाकि सब बेवफाई हे। 


जब भी देखता हूँ, मैं मौसम को,
तेरे दिल का हाल जान जाता हूँ।
जब भी बहती है ये तेज हवा,
मैं भी अंदर से सहम जाता हूँ।

इंतजार होता है मुझे,
कब वो पहली बारिश की फुहार आये।
दुआ करता हूँ,
कभी रेतीला तूफान ना आये।
मुझको इंतजार होता है,
कब वो फाल्गुन का महीना आये,
फिजा में हर ओर रंग ही रंग घुल जाये।
जो खो चुकी थी अब तक,
वो फूलों की खुशबू हर तरफ फैल जाये।



मैं तेरे दिल का हाल जान जाता हूँ
हर एक बात कहने से पहले समझ जाता हूँ।
जब भी मौसम बदलता है,
मैं तेरा बदला हुआ मिजाज समझ जाता हूँ।

दुआ करता हूँ खुदा से,
इस चमन को फूलों की खुशबू और बारिश की फुहारे मिल जाये।
मेरा यार जो नाराज है,
उसके चेहरे पर हंसी आ जाए।


देश के वीर जवानों की सुनी बहुत कहानी है,
चलो आज एक पन्ना पलटे,
कहानी वीरांगनाओं की सुनते हैं|
ये देश की वो वीर नारियां है,
जो लड़ी कभी मां बन कर,
जो खड़ी हुई बहन बन कर,
जिसने बेटी बन कर उन सपनों को स्वीकार किया|

चलो पन्ने पलटते हैं , ऐसी ही साहसी बेटियों के|
कुछ ने कल ही तो शादी का जोड़ा देखा था,
कुछ ने दो क्षण संग बिताए थे,
कुछ अभी एक नन्ही सी बच्ची को इस दुनिया में लाई थी,
कुछ दो दिन पहले ही राखी बांध के आई थी|

यह सब दृढ़ संकल्प खड़ी रही,
जब भी एक जवान शहीद हुआ|
ये ज्यादा कुछ ना बोली थी,
पर इन्होंने भी तो बलिदान दिया|
ठानी उन सपनों को सच करने की,
जो देखे थे बलिदानी वीरों ने|
सेवा भाव से हर काम किया,
और देश का ऊंचा नाम किया|

चलो सलाम करते हैं, भारत की हर एक बेटी को,
जिसने हर  क्षण, हर रूप  मैं सर्वोच्च बलिदान दिया|

मैं अनपढ़ हूँ, अच्छा हूँ;
मुझे बातें बनानी नहीं आती।
मैं देखता हूँ, दुनिया को;
मुझे झूठी दुनिया बनानी नहीं आती।
कम बोलता हूँ, सच बोलता हूँ;
मुझे अफवाह फैलानी नहीं आती।

अच्छा है, मैं अनपढ़ हूँ;
मुझे धोखाधड़ी नहीं आती।
कमा लेता हूँ, मैं मेहनत से;
मुझे कागजी चोरी नहीं आती।
हुनर तो सीख लेता हूँ;
पर जालसाजी नहीं आती।

अच्छा है, मैं अनपढ़ हूँ;
मुझे ये खबरें समझ नहीं आती।
समझता हूँ, मैं दर्द सीने का;
उस पर राजनीति करनी नहीं आती।

समझता हूँ, देश के खतरों को;
इसलिए जवान की इज्जत करनी आती है।
शराफत ही अमानत है;
उसमें मेरी गरीबी आड़े नहीं आती।
समझ थोड़ी सी कम होगी;
पर शराफत नहीं जाती।

अच्छा है, मैं अनपढ़ हूँ;
मुझे देश से गद्दारी नहीं आती|

 मुझे इल्म है बेटा,
सफर जिंदगी का तेरा कुछ छोटा रह गया।
तू जानता है,
तेरा मेरा रिश्ता सदियों पुराना है।
तू ना कर फिक्र बेटा,
तुझे अब मेरे साए में आना है।
तू जिंदा था, तू जिंदा है,
ये दुश्मन को बताना है।
लहू के हर एक कतरे का बदला लेकर आएंगे,
अब शहादत आने से पहले,
हर एक दुश्मन को उसके घर में गिराएंगे।
सबक होगा ऐसा,
कि दुश्मन की रूह कांप जाएगी।
जब  भी जिक्र होगा तेरा,
तेरा जज्बा याद आयेगा।
मेरी धरती का हर एक हिस्सा,
तेरे किस्से सुनाएगा|

इसी श्रृँखला में पढे : वीर सपूतों के नाम

देख माँ तेरा आंचल रंग आया हूँ,
बच्चों को तेरी बाँहों में रोता छोड़ आया हूँ।
शिकायत तो उसको होगी ना माँ,
बिन बताए जिसे मैं चला आया हूँ।
जिंदगी के सफर में सबको अकेला छोड़ आया हूँ,
तुझसे मिलने को उस बूढ़ी मां को अकेला छोड़ आया हूँ।

मैं अभी थका तो नहीं था,
पर तेरे कदमों में जा ये लगा आया हूँ।
मैं मिटाकर सब रंग एक घर के,
तेरे गुलिस्तां को दुश्मनों से बचा आया हूँ।

मेरे भाई, मेरा बदला तो ले आएंगे,
दुश्मन को उसके घर में कुचल आएंगे।
ना उठा पाएगा नजर फिर से,
इस बार वो ऐसा कुछ कर आयेंगे।

मैं आगे बढ़ा, तो पीछे विरासत शहादत की छोड़ आया हूँ,
मैं अकेला चला था, आज अपने पीछे सैकड़ों को खड़ा कर आया हूँ।

मैंने गुरबत के दिनों में,
इधर देखा, उधर देखा,
पर अपने अंदर नहीं देखा|

छिपे थे मोती मुझ में,
पर अपने अंदर के समंदर को छोड़,
मैंने हर एक छोटी-बड़ी दरिया को देखा|

छुपी थी आशा की किरण मुझ में,
पर हर बार मैंने आसमा की ओर देखा|

मैंने समझाने वाले लोगों की ओर देखा,
पर जिस दिल को समझाना था, 
कभी उस और नहीं देखा|
Inspiration Poem, Hindi Poem, Self-Motivation


कहीं एक बार फिर गिर ना जाऊं,
इस डर से मैंने ऊंचाइयों को नहीं देखा|

दौलत-शोहरत देखी मैंने लोगों की,
पर उनके जज्बे को नहीं देखा|

मैंने हर एक चीज देखी गुरबत के दिनों में,
पर अपने अंदर बहुत देर से देखा|

क्या सच में अपने चाहने वालों से
प्यार जाहिर करने का कोई त्यौहार होता है!

क्या यह मुमकिन है कि एक दिन बाहों में भरने का,
और एक इजहार करने का पहले से मुकर्रर होता है?

क्यों बस प्यार एक हफ्ते ही सबकी जुबान पर होता है,
और फिर पूरे साल हमको क्या करना होता है?
Romantic Poem, Valentine Day, Shayari
True Love - Ishqiya
क्या जो सबको दिखाया जाए वहीं बस प्यार होता है,
कैसे एक प्याली कॉफी के पीने से प्यार पुख्ता होता है,
कैसे सिनेमाहॉल में चुप बैठे रहने से यह प्यार आगे बढ़ता है?

छलकते जाम और धूए मैं धुंधली शाम,
जहां पर शोर सबसे ज्यादा होता है,
ऐसे में जो बातें की उससे क्या एतबार बढ़ता है?

मुहब्बत तो एक आजाद ख्याल है,
मैं इसको कैसे चंद दिनों में बांट लूं।
मुहब्बत तो दिल का सच्चा जज्बात है,
मैं कैसे इसे वेलेंटाइन डे में बांध लूं।

तितलियों के रंगीन पंखों ने हमको खींचा,
या हमारी उड़ने की चाहत ने हमको उनकी ओर खींचा.
मैं तो उड़ने लगा था, आंखों में भर कर ख्वाब ढेर सारे.
Kids Poem, Poem at Childhood, Hindi Poem

न जाने क्यों हर आसमानी  चीज भाने लगी थीं, 
आसमां पर सितारों से ज्यादा उड़ते बादल भाने लगे थे.

बिन बताएं खुशियां दस्तक देने लगी थी, तितलियों सी  रंगीन जिंदगी हो चली थी.
न जाने क्यों जवानी की आते ही वो नजर खो चुकी थी, सब कुछ वही था पर हंसी खो चुकी थी.


बचपन से जुड़ी हुई एक कविता - बचपन की हसीन यादे

ऐ जिंदगी तेरा नाम इतिहास की सबसे बड़ी जंग में शामिल क्यों नहीं?
हर वक्त तो लड़ते हैं हम जीने के लिए,
लड़ते हैं कभी छत के लिए, कभी इस तन को ढकने के लिए।
लड़ता है गरीब दो वक्त की रोटी के लिए, और लड़ते हैं हम मजहब के लिए।
खून के प्यासे हो जाते हैं हम शोहरत के लिए।
Poem on Ideology, Social Poem, Political Poem in Hindi

जिंदा रहना भी एक सलीका है, वरना मासूम यहां पीस जाते है।
न कोई तीर - न कोई दुश्मन नजर आता है, 
जब चोट होती है तभी आघात नजर आता है। 
जिंदगी तेरा नाम कहीं जिद्द तो नहीं,
ना जाने किसकी जिद्द के लिए, ना जाने कौन इस दुनिया से चला जाता है ।
जिंदगी तेरा नाम इतिहास की सबसे बड़ी जंग में शामिल क्यों नहीं?
हर वक्त लड़ रहे हैं हम, इसलिए यह ख्याल आता है।

                                                               इस श्रृंखला की पहली कविता - जिंदगी .01