मुझे इल्म है बेटा,
सफर जिंदगी का तेरा कुछ छोटा रह गया।
तू जानता है,
तेरा मेरा रिश्ता सदियों पुराना है।
तू ना कर फिक्र बेटा,
तुझे अब मेरे साए में आना है।
तू जिंदा था, तू जिंदा है,
ये दुश्मन को बताना है।
लहू के हर एक कतरे का बदला लेकर आएंगे,
अब शहादत आने से पहले,
हर एक दुश्मन को उसके घर में गिराएंगे।
सबक होगा ऐसा,
कि दुश्मन की रूह कांप जाएगी।
जब  भी जिक्र होगा तेरा,
तेरा जज्बा याद आयेगा।
मेरी धरती का हर एक हिस्सा,
तेरे किस्से सुनाएगा|

इसी श्रृँखला में पढे : वीर सपूतों के नाम

देख माँ तेरा आंचल रंग आया हूँ,
बच्चों को तेरी बाँहों में रोता छोड़ आया हूँ।
शिकायत तो उसको होगी ना माँ,
बिन बताए जिसे मैं चला आया हूँ।
जिंदगी के सफर में सबको अकेला छोड़ आया हूँ,
तुझसे मिलने को उस बूढ़ी मां को अकेला छोड़ आया हूँ।

मैं अभी थका तो नहीं था,
पर तेरे कदमों में जा ये लगा आया हूँ।
मैं मिटाकर सब रंग एक घर के,
तेरे गुलिस्तां को दुश्मनों से बचा आया हूँ।

मेरे भाई, मेरा बदला तो ले आएंगे,
दुश्मन को उसके घर में कुचल आएंगे।
ना उठा पाएगा नजर फिर से,
इस बार वो ऐसा कुछ कर आयेंगे।

मैं आगे बढ़ा, तो पीछे विरासत शहादत की छोड़ आया हूँ,
मैं अकेला चला था, आज अपने पीछे सैकड़ों को खड़ा कर आया हूँ।

मैंने गुरबत के दिनों में,
इधर देखा, उधर देखा,
पर अपने अंदर नहीं देखा|

छिपे थे मोती मुझ में,
पर अपने अंदर के समंदर को छोड़,
मैंने हर एक छोटी-बड़ी दरिया को देखा|

छुपी थी आशा की किरण मुझ में,
पर हर बार मैंने आसमा की ओर देखा|

मैंने समझाने वाले लोगों की ओर देखा,
पर जिस दिल को समझाना था, 
कभी उस और नहीं देखा|
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कहीं एक बार फिर गिर ना जाऊं,
इस डर से मैंने ऊंचाइयों को नहीं देखा|

दौलत-शोहरत देखी मैंने लोगों की,
पर उनके जज्बे को नहीं देखा|

मैंने हर एक चीज देखी गुरबत के दिनों में,
पर अपने अंदर बहुत देर से देखा|

क्या सच में अपने चाहने वालों से
प्यार जाहिर करने का कोई त्यौहार होता है!

क्या यह मुमकिन है कि एक दिन बाहों में भरने का,
और एक इजहार करने का पहले से मुकर्रर होता है?

क्यों बस प्यार एक हफ्ते ही सबकी जुबान पर होता है,
और फिर पूरे साल हमको क्या करना होता है?
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क्या जो सबको दिखाया जाए वहीं बस प्यार होता है,
कैसे एक प्याली कॉफी के पीने से प्यार पुख्ता होता है,
कैसे सिनेमाहॉल में चुप बैठे रहने से यह प्यार आगे बढ़ता है?

छलकते जाम और धूए मैं धुंधली शाम,
जहां पर शोर सबसे ज्यादा होता है,
ऐसे में जो बातें की उससे क्या एतबार बढ़ता है?

मुहब्बत तो एक आजाद ख्याल है,
मैं इसको कैसे चंद दिनों में बांट लूं।
मुहब्बत तो दिल का सच्चा जज्बात है,
मैं कैसे इसे वेलेंटाइन डे में बांध लूं।

हिन्दी कविता संग्रह on Childhood Memory (बचपन की यादें)


तितलियों के रंगीन पंखों ने हमको खींचा,
या हमारी उड़ने की चाहत ने हमको उनकी ओर खींचा.
मैं तो उड़ने लगा था, आंखों में भर कर ख्वाब ढेर सारे.
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न जाने क्यों हर आसमानी  चीज भाने लगी थीं, 
आसमां पर सितारों से ज्यादा उड़ते बादल भाने लगे थे.

बिन बताएं खुशियां दस्तक देने लगी थी, तितलियों सी  रंगीन जिंदगी हो चली थी.
न जाने क्यों जवानी की आते ही वो नजर खो चुकी थी, सब कुछ वही था पर हंसी खो चुकी थी.



Childhood (बचपन) से जुड़ी अन्य स्वरचित हिन्दी कविताएँ( Hindi Poem Collection on Childhood)

1. बचपन शीर्षक पर कविता - भाग 2 । Hindi Kavita on Childhood

2. Collection of Poems on Childhood( बच्चपन पर कविता - भाग 1)

3. Poem on Childhood in Hindi - बचपन पर हिन्दी कविता

ऐ जिंदगी तेरा नाम इतिहास की सबसे बड़ी जंग में शामिल क्यों नहीं?
हर वक्त तो लड़ते हैं हम जीने के लिए,
लड़ते हैं कभी छत के लिए, कभी इस तन को ढकने के लिए।
लड़ता है गरीब दो वक्त की रोटी के लिए, और लड़ते हैं हम मजहब के लिए।
खून के प्यासे हो जाते हैं हम शोहरत के लिए।
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जिंदा रहना भी एक सलीका है, वरना मासूम यहां पीस जाते है।
न कोई तीर - न कोई दुश्मन नजर आता है, 
जब चोट होती है तभी आघात नजर आता है। 
जिंदगी तेरा नाम कहीं जिद्द तो नहीं,
ना जाने किसकी जिद्द के लिए, ना जाने कौन इस दुनिया से चला जाता है ।
जिंदगी तेरा नाम इतिहास की सबसे बड़ी जंग में शामिल क्यों नहीं?
हर वक्त लड़ रहे हैं हम, इसलिए यह ख्याल आता है।

                                                               इस श्रृंखला की पहली कविता - जिंदगी .01