हिमालय को हम पर्वतों का राजा कहते हैं। इसकी सुन्दरता और दर्द पर लिखी गई यह Hindi Poem आपको बहुत से Social Issues पर सोचने के लिए  मजबूर करेगा।


Poetry on Mountains in Hindi - पर्वतों पर हिन्दी कविता

तेरी खूबशूरती का दीदार करते हैं,
जब भी मन हो घूमनें का
तेरी ही बात करते हैं
ख्यालों में हम हरदम
तेरी वादियों में होते हैं।
ये पहाड़ियाँ होती ही ऐसी हैं,
सबको अपना बनाती हैं।

हम जाते हैं बिताने
 सबसे हँसी लम्हा पहाड़ों पर।
पर कभी ना सोचा हमने
क्या छोड़कर बदले में आते हैं।

चार धाम, पंच प्रयाग,
या फिर कश्मीर की हँसी वादियाँ।
सब कुछ तो मिलता है इन पहाड़ों में
फिर भी हम लौटते हैं ऐसे,
जैसे फिर वापस ना आयेंगे।
फैलाते है हर तरफ कचरा,
कहीं प्लासटिक तो कहीं बोतल।
क्या हम घूमने थे आये,
या कोई दुश्मनी पुरानी है।

सहम जाते हैं ये पर्वत,
जब देखते हैं यह मंजर।
खूबशूरत है जो दुनिया
उसे यूँ बरबाद ना करना।
आओ जब भी पहाड़ों पर
इसे बच्चों की तरह सहेज कर रखना।

Poem on Mountains in Hindi

पहाड़ों पर बढता प्लासटिक कचरा यहाँ की सुन्दरता व पर्यावरण दोनों को नुकसान पहुँचाता है। उम्मीद है यह Hindi Poem on Mountain आपको पसंद आयेगी, और आप जब भी पहाड़ों पर घूमने जायें तो अपना कचरा खुले में फेंक कर ना आयें।

Hindi Poem on Mountains - हिमालय पर्वत पर बन रही सड़को पर कविता


इन पहाङी वादियो में धूल सी क्यों छा गयी,

यह विकास की आंधी कैसी आयी है।

दरक रहे हैं न जाने कितने हिस्से मेरे पहाङ के,

ये टूटते पत्थर, फिसलती मिट्टी, न जाने कब कहर बन जायेगी।


प्रकृति को प्रकृति ही जुदा करने की

किसने यह तरकीब बनायी है।

सङकों के माया जाल में,

हम बन बैठे अनजान हैं।


ये कल-कल करती नदियाँ, 

हर पल गिरते झरने,

और पुराने बजारो की रौनक,

कहीं गुम होते जा रहे हैं।

वो सूरज का ढलना, पहाङो में छिपना,

धूल की चादर में सिमटता जा रहा है।

चिङियों का चहकना, नदियों का कल-कल,

मशीनी आवाजों से दबता जा रहा है।

Hindi Poem om Mountains, Hindi Poem on Pain of Mountain

फिर आती है वर्षा, करती है तांडव,

मंजर तबाही का हमको है दिखाती।

रुलाता है हमको हर छोटा नुकसान अपना,

पर पेङों का कटना, बेघर जानवरों का होना,

क्यों नहीं हमको हे रुलाता।


जिन्दगी जीने का मायना बदला है हमने,

हर जगह मोल- भाव करते हैं यूँ ही।

विकास की आँधी चली कुछ इस कदर है,

भूल जाते हैं हम, हमको इसी प्रकृति ने है बनाया।


संजोयेंगे हम तो, प्यार करती रहेगी,

बिखेरेंगे हम तो, सन्तुलन वो खुद है बनाती।

इंतजार क्यों उस दिन का है करना,

जब बनना पड जाये मूकदर्शक हमको।


यह कविता हिमालय पर्वत पर हो रहे निर्माण कार्यो की वजह से हो रहे नुकसान पर आधारित है। एक तरफ विकास कार्य आवश्यक भी है पर इसकी वजह से पहाड़ो की सुन्दरता खोती सी जा रही है। इसी दर्द को बया करती है Himalaya Parvat पर लिखी यह कविता।


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वनीकरण पर कविता

आज के समय में Afforestation(वनीकरण) ही हमको ग्लोबल वार्मिंग जैसी विकट समस्या से बचा सकता है। यह सुन्दर हिन्दी कविता आपको वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करेगी, और एक सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश भी देगी।

गर्मी का जब मौसम आता
सूरज का चढता पारा
हम सबको है बहुत सताता।
पानी का स्तर तो देखो
सालों-साल गिरता है जाता।
बरसात का जब मौसम आता
तबाही का मंजर साथ में लाता।
आती है जब सर्दी फिर से
धूएँ की चादर शहरों पर चढ जाती।

रोज सोचता हूँ मैं घर में
इन सबसे हमें कौन बचाता।
जब धरती में लगता है एक नन्हा पौधा
कुछ सालों में पेड़ वो बनता।
नित शुद्ध हवा ये हमको देता
जो प्रदूषण से है लड़ता।
जब दोपहरी में धूप है चढती
तब हमको ये छाया देता।
आती है जब बाढ और आंधी
पहले वो इन पेड़ों से है टकराती।
जीते हैं ये पेड़ हमेशा
मानवता की रक्षा को।

कर्तव्य हमारा भी है बनता
हम मिल-जुल कर कुछ पेड़ लगायें।
वनीकरण को जीवन में अपनाना है,
वृक्षों की संख्या को बढाना है।
सारी समस्या हल होगी,
ग्लोबल वार्मिंग नही रहेगी।

ग्लोबल वार्मिंग सिर्फ समस्या ही नहीं है, यह हमारे आने वाले भविष्य के लिए एक बहुत बड़ा खतरा भी है। आशा है, Afforestation ( वनीकरण) पर लिखी यह कविता इस विषय पर सबसे अच्छी कविता लगे और आप इसको ज्यादा से ज्यादा बच्चों तक पहुँचायें। आपके परिवार में जितने भी सदस्य है उनके नाम से हर साल कम से कम एक वृक्ष जरूर लगायें। हमारी सभी कविताएँ स्वरचित होती हैं।

Hindi Poem on Afforestation
Picture Credit : Environment Buddy


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