हिन्दी कविता Youtube Video के साथ - लाडला

मैंने चिरागों को तूफानों से लड़ते देखा है,
दिन दीवाली के मोम पिघल जाने पर भी लो को जलते देखा है।
दिन खुशी का हो तो अपाहिज को भी झूमते देखा है,
माँ के साये में हर बच्चे को हंसते देखा है।
गुरूर उनको है सानो शौकत का,
मैंने तो माँ की कदमों की आहट से सोना बरते देखा है।
मेरी गुरबत को तू कौड़ियो में न गिन,
मैं उस सल्तनत का शहजादा हूँ , जो
मेरी माँ ने सपनों मैं देखा है।  



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