Poem No.19 - अगर ये आखिरी दिन होता

क्या होता जो ये जिंदगी का आखिरी दिन होता,
ये आने वाला कल बस बातों में रह जाता,
जो आदत पड़ी है मुझको छोड़ने की कल पर,
क्या आज भी इस दिन को कल पर छोड़ जाता।

बिन वक्त गवाये मैं कुछ काम में जुट जाता,
यादों में रहते है जो दोस्त मेरे, उनसे मैं कुछ बातें कर लेता।
झट से करता एक मैसज टाईप, और थैंक्यू मैं सबसे कहता।
याद करता उन सबको, जिनको किया परेशान कभी,
उन सबको दिल से सॉरी मैं कहता।

सोने को गोद तलाशता मैं माँ की,
लड़-झगड़ने को भाई-बहिन को बुला लेता,
बच्चों को सिर्फ प्यार ही देता,
और जीवन-साथी को कहता,
बैठो दो घड़ी तुमको निहार लूँ,
बाते बस उस पल दिल की होती,
रिश्ते पर उम्र का पहरा ना होता।

मैं हर वो कोशिश करता, 
जो मैंने छोड़ दी था कल पर,
मैं हर वो काम मुकम्मल करता,
जिसका मुझमें हुनर होता।

शायद मैं भूल जाता मजहब को,
दिल में कोई बैर न होता,
सब में मुझको अच्छा ही दिखता,
सब कुछ मुझको मुमकिन लगता।

शायद हम सब कुछ ऐसा ही करते,
जो ये हमारा आखिरी दिन होता,
ये दिन गुजरेगा और एक नया वर्ष शुरू हो जायेगा,
कब तक कल पर छोड़े जीवन को,
अब बस आज को ही बेहतर जीया जायेगा। 
                                           "" Very Happy New Year to All of You ""


Live everyday like its your last, follow your dreams, forget your problems, never hold back, you never know what's around the corner.

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