Poem on Hope in Hindi - आशाएँ

एक बहुत ही दिल को स्पर्श करने वाली हिन्दी कविता उम्मीदों के ऊपर लिखी गई है। Hindi Poem on Hope हमको भविष्य के लिए Inspire भी करती हैं, और हमारे लक्ष्य निर्धारित करने में सहायता भी करती हैं। प्रस्तुत है यह कविता।

Hindi Poetry on Hope - आशाओं पर हिन्दी कविता

तितलियों से पर निकलने लगे हैं, मेरी उम्मीदों के
देख पाता हूँ मैं अब, इस क्षितिज के पार भी।
रंगों से भरे जो यह मेरे पंख हैं,
जिंदगी के खट्टे-मीठे रंगों से हैं इनको रंगा।

पंख कितने ही हों छोटे
इससे नहीं अब कोई वास्ता।
उड़ने का हुनर है मुझमें
मंजिल मिलेगी, यह मुझे उम्मीद है।

उम्मीदों ने भरा है मुझमे
कुछ कर गुजरने का हौसला।
राह कोई भी हो,
कर ही लूँगा एक दिन फतह।

तितलियों से पर निकलने लगे हैं, मेरी उम्मीदों के
देख पाता हूँ मैं अब, इस क्षितिज के पार भी।

Poem on Hope in Hindi, Hindi Poem on Hope

यह Hindi Poem on Hope आपको पसंद आयी होगी और आपको इससे Motivation भी मिला होगा। आशाएँ हमको सफलता की ओर ले जाती हैं, जिसको हम निराशा के अन्धकार में अक्सर नही देख पाते हैं। हमारी सभी कविताएँ स्वरचित हैं।


प्रेरणादायक हिन्दी कविता उम्मीदो पर - Never Give Up Hope Hindi Poem

क्या खोजते हो दुनिया में,
जब सब कुछ तेरे अन्दर है।
क्यों देखते हो औरों में,
जब तेरा मन ही दर्पण है।

दुनिया बस एक दौड़ नहीं,
तू भी अश्व नहीं है धावक।
रुक कर खुद से बातें करले,
अन्तर मन को शान्त तो करले।

सपनों की गहराई समझो,
अपने अन्दर की अच्छाई समझो।
स्वाध्याय की आदत डालो,
जीवन को तुम खुलकर जीलो।

आलस्य तुम्हारा दुश्मन है तो,
पुरुशार्थ को अपना दोस्त बनालो।
जीवन का ये रहस्य समझलो,
और खुशीयों से तुम नाता जोड़ो।

Hindi Motivational Poem on Hope - प्रेरक कविता आशाओं पर


सपनों  का एक सागर है,
सागर में गहराई है,
कोई ना इसको नाप है पाया।

तेरे सपने तेरी मंजिल,
तुझको ही तय करनी है।
छोर मिलेगा उसको ही,
जिसने हिम्मत करली है।
तूफान यहाँ हैं पग-पग पर,
निराशा के हैं ज्वार बहुत।
तेरे सपने, तेरी हिम्मत है,
बदलेगा ये दुनिया तू।

आज निकलजा अन्धियारे में,
कल का सूरज तेरा है। 
सपनों के इस सागर में,
सपनों का एक जाल भी है।
ध्यान रहे तू अर्जन है,
एक लक्ष्य ही तेरा सब कुछ है।
लहरों से टकराना  है,
उनसे भी ऊपर उठ जाना है।
कल जो आने वाला है,
उसको अपना बनाना है।

आशाओं से भरी जिंदगी पर कविता - Hindi Poem on Life with Hope


मैंने गुरबत के दिनों में,
इधर देखा, उधर देखा,
पर अपने अंदर नहीं देखा|

छिपे थे मोती मुझ में,
पर अपने अंदर के समंदर को छोड़,
मैंने हर एक छोटी-बड़ी दरिया को देखा|

छुपी थी आशा की किरण मुझ में,
पर हर बार मैंने आसमा की ओर देखा|

मैंने समझाने वाले लोगों की ओर देखा,
पर जिस दिल को समझाना था, 
कभी उस और नहीं देखा|

कहीं एक बार फिर गिर ना जाऊं,
इस डर से मैंने ऊंचाइयों को नहीं देखा|

दौलत-शोहरत देखी मैंने लोगों की,
पर उनके जज्बे को नहीं देखा|

मैंने हर एक चीज देखी गुरबत के दिनों में,
पर अपने अंदर बहुत देर से देखा|

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