Poem no.6 - यादे

आज पहली दफा तो नहीं, जो मुझको तेरी याद आयी।
पर सच कह रहा हूँ, पहले कभी इस कदर ना मुझको रुला पाली।
न जाने कौन बरसा हे इस सावन ज्यादा, बाहर देखा तो पानी, घर में देखा तो पानी।
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आप कहते हो हमारी यादें आपको बड़ा सताती है,
हम तो कह भी न सके कि तुम्हारी यादें हमको कितना रुलाती है।
इश्क में फासलों का दस्तूर पुराना है, और दूर होने पर इश्क के बढ़ जाने का किस्सा पुराना है।
इश्क के न जाने कितने नाम हे दुनिया में, पर जो हमारे दरमियान हे उसे क्या नाम दूँ।
जिन रिश्तों में साथ नसीब में न हो, उनकी मीठी यादें ही सजो लेना अच्छा है।
कभी रोने का सहारा होगी, तो कभी हँसने का बहाना होगी।

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