Poem No.29 - इश्किया 01

जब भी देखता हूँ, मैं मौसम को,
तेरे दिल का हाल जान जाता हूँ।
जब भी बहती है ये तेज हवा,
मैं भी अंदर से सहम जाता हूँ।

इंतजार होता है मुझे,
कब वो पहली बारिश की फुहार आये।
दुआ करता हूँ,
कभी रेतीला तूफान ना आये।
मुझको इंतजार होता है,
कब वो फाल्गुन का महीना आये,
फिजा में हर ओर रंग ही रंग घुल जाये।
जो खो चुकी थी अब तक,
वो फूलों की खुशबू हर तरफ फैल जाये।



मैं तेरे दिल का हाल जान जाता हूँ
हर एक बात कहने से पहले समझ जाता हूँ।
जब भी मौसम बदलता है,
मैं तेरा बदला हुआ मिजाज समझ जाता हूँ।

दुआ करता हूँ खुदा से,
इस चमन को फूलों की खुशबू और बारिश की फुहारे मिल जाये।
मेरा यार जो नाराज है,
उसके चेहरे पर हंसी आ जाए।

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